सरोगेसी का अर्थ और महत्व परिचय: समय के साथ, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास ने मानव जीवन के कई क्षेत्रों में नए और उत्तराधिकारी मार्गों का खुलासा किया है। इसी तरह, सरोगेसी नामक विशेष विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके एक नया मातृत्व प्रणाली की संभावना को उजागर किया है। सरोगेसी का मतलब होता है किसी अन्य महिला के गर्भ का उपयोग करके किसी दूसरे जोड़े के लिए बच्चे की प्राप्ति करना। यह प्रक्रिया उन जोड़ों के लिए एक उपाय साबित होती है जो अपने बालकों के साथ पितृत्व का आनंद नहीं ले सकते। सरोगेसी के प्रकार:
गेस्टेशनल सरोगेसी: इसमें महिला के गर्भ में उत्तक बच्चा उत्पन्न होता है, लेकिन उस बच्चे का आरोपी माता या माता-पिता नहीं होता। यहाँ तक कि बालक जीविता होते ही उन्हें उनके आरोपी माता-पिता के पास ही भेज दिया जाता है।
ट्रेडीशनल सरोगेसी: इसमें आरोपी माता अपने आप को उस बच्चे की माँ मानती है जिसके लिए वह गर्भवती होती है, लेकिन उसके जन्म के बाद उसका हक उसके आरोपी माता-पिता को देना पड़ता है।
आल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी: यह सरोगेसी नामक प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए होती है जो दूसरों की मदद करने के लिए तैयार होती हैं, बिना किसी भुगतान के।
सरोगेसी का महत्व: सरोगेसी का महत्व आजकल के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में बढ़ चुका है। यह उन जोड़ों के लिए एक बड़ी सहायता साबित होती है जिन्हें अपने बालकों के साथ पितृत्व का आनंद नहीं ले सकते हैं, चाहे वे वैज्ञानिक तकनीकों की वजह से हो या फिर बायोलॉजिकल कारणों से। सरोगेसी के पृष्ठभूमि: सरोगेसी का प्रथम उल्लेख महाभारत काल में हुआ था, जब कुंती ने कर्ण को सूर्य देव की शपथ दी थी कि वह बच्चा सरोगेसी के रूप में पैदा होगा। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ डॉक्टर्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के सहायता से आजकल करने में संभव हो रही है। समापन: सरोगेस
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